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आ जा रि चांदनी, हमारो पूनो चांद लेके आ जा-२!
June 15, 2020
भजन
jambudweep
आ जा रि चांदनी
आ जा रि चांदनी, हमारो पूनो चांद लेके आ जा-२।
हम सब आश लगाए-आ जा, तेरे दर्शन पाएं-आ जा।।
जीवन सफल बनाएं-आ जा।। आ जा…।।टेक.।।
धरती पर इक चांद जो आया, नभ का चांद स्वयं शरमाया।
ज्ञानमती बन ज्ञान लुटाया, जग को जीवन सार बताया।। आ जा रि चांदनी…।।१।।
अवध की धरती मांग रही थी, अपने चांद को चाह रही थी।
पाकर मानो सब कुछ पाया, ज्ञानमती माता की छाया।। आ जा रि चांदनी…।।२।।
तुम सी अद्भुत कन्या पाकर, धन्य टिकैतनगर रत्नाकर।
ऐसे तुमने किये हैं काम, हुआ ग्राम का जग में नाम।। आ जा रि चांदनी…।।३।।
तुमने कई इतिहास रचे हैं, तेरे गुणों के बाग सजे हैं।
ग्रंथों का भण्डार भरा, तुझमें श्रुत का सार भरा।। आ जा रि चांदनी…।।४।।
श्वेत वसन में तेरी सूरत, लगती जिनवाणी सम मूरत।।
सबको दें ऐसा वरदान, लहे ‘‘चन्दना’’ तुम सम ज्ञान। आ जा रि चांदनी…।।५।।
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