Jambudweep - 7599289809
encyclopediaofjainism@gmail.com
About Us
Facebook
YouTube
Encyclopedia of Jainism
Search
विशेष आलेख
पूजायें
जैन तीर्थ
अयोध्या
अर्हंत :!
November 27, 2015
शब्दकोष
jambudweep
[[श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] ==
अर्हंत :
==
घनघातिकर्ममथना:, त्रिभुवनवरभव्यकमलमार्तण्डा:। अर्हा: (अर्हन्त:) अनन्तज्ञानेन, अनुपमसौख्या जयन्तु जगति।।
—समणसुत्त : ७
सघन घाति कर्मों का आलोड़न करने वाले, तीनों लोकों में विद्यमान भव्य जीव रूपी कमलों को विकसित करने वाले सूर्य, अनन्तज्ञानी और अनुपम सुखमय अर्हंतों की जगत में जय हो।
Tags:
Suktiya
Previous post
अलोक :!
Next post
अविद्या :!
Related Articles
ब्रह्मचर्य :!
November 29, 2015
jambudweep
नववर्ष मंगलमय हो!
July 29, 2017
jambudweep
अधर्म द्रव्य :!
November 27, 2015
jambudweep
error:
Content is protected !!