तर्ज-बाबुल की दुआएँ…….
उत्तम संयम के पालन से, मानव को शिव का द्वार मिले।
निज मन पे नियंत्रण करने से, रत्नत्रय का भंडार मिले।।
पारस मणि को पाना जैसे, दुर्लभ ही नहीं अतिदुर्लभ है।
वैसे ही संयमरूपी मणि को, पाना भी अति दुर्लभ है।।
यदि मिल जावे वह रत्न तो समझो, मोक्षपंथ साकार मिले।
निज मन पे नियंत्रण करने से, रत्नत्रय का भंडार मिले।।१।।
इन्द्रियसंयम-प्राणीसंयम से, संयम द्वैविध माना है।
इनका पालन करने वालों को, शिवपद निश्चित पाना है।।
श्रावक को भी किंचित् संयम, पालन से सुख आधार मिले।
निज मन पे नियंत्रण करने से, रत्नत्रय का भंडार मिले।।२।।
यदि संयम पालन कर न सको, निंदा न संयमी की करना।
उनकी पूजन आहार आदि से, निज आतम शुद्धी करना।।
‘‘चन्दनामती’’ संयम व संयमी, में ही सुख का सार मिले।
निज मन पे नियंत्रण करने से, रत्नत्रय का भंडार मिले।।३।।