श्रीमती शांतिदेवी जैन
माता मोहिनी देवी की द्वितीय संतान के रूप में आपका जन्म सन् १९३७ में हुआ। युवावस्था में आपका विवाह मोहोना (लखनऊ के निकट) निवासी श्री गुलाबराय के सुपुत्र श्री राजकुमार जैन के साथ सम्पन्न हुआ। आपके चार पुत्र एवं तीन पुत्रियाँ हैंं। सभी पुत्र-पुत्रियाँ विवाहित होकर यथायोग्य गृहस्थधर्म के परिपालन करने के साथ-साथ धार्मिक क्रियाओं में भी संलग्न हैं। आपके आठ पौत्र-पौत्री एवं पाँच नाती-नातिन हैं।श्री राजकुमार जी कपड़ा एवं सर्राफा के व्यवसायी हैं। चारों पुत्र भी कुशलता के साथ व्यवसायवृद्धि में निरन्तर तत्पर हैं। वर्तमान में आप डालीगंज-लखनऊ में निवासरत हैं।
श्री वैâलाशचंद जैन
आपका जन्म सन् १९३९ में हुआ। विवाह योग्य होने पर आपका विवाह टिवैâतनगर के ही श्रेष्ठी श्री शांतिप्रसाद जी की सुपुत्री चन्दारानी के साथ किया गया।
पिछले कई वर्षों से आप चौक-लखनऊ में निवास कर रहे हैं। आपके दो पुत्र एवं दो पुत्रियाँ हैं। आपकी बड़ी पुत्री कु. मंजू जैन शास्त्री बालब्रह्मचारिणी हैं और प्राय: पूज्य गणिनीप्रमुख आर्यिकारत्न श्री ज्ञानमती माताजी के संघ में धर्माराधन करती हैं। आपके चार पौत्र, दो नाती-नातिन, एक प्रपौत्र एवं एक प्रपौत्री है। आप सर्राफा एवं हीरा-कुन्दन आदि के कुशल व्यापारी हैं तथा दीर्घकाल से लखनऊ सर्राफा एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं एवं उत्तरप्रदेश सर्राफा एसोसिएशन के मुख्य संयोजक हैं।
सौ. श्रीमती जैन
चतुर्थ संतान के रूप में श्रीमती जैन का जन्म सन् १९४१ में हुआ। आपका विवाह पखरपुर जि. बहराइच (उ.प्र.) निवासी श्री सुखानंद जैन के सुपुत्र श्री प्रेमचंद जैन के साथ सम्पन्न हुआ। आपके दो पुत्र एवं चार पुत्रियाँ हैं। सबसे छोटी पुत्री कु. आस्था जैन पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी से आजन्म ब्रह्मचर्य व्रत लेकर संघ में ही आत्मकल्याण एवं ज्ञानाराधना कर रही हैं। आपके पाँच पौत्र-पौत्री एवं छ: नाती-नातिन हैं।
आपके दोनों पुत्रों का बहराइच में ही कपड़े-सर्राफे का व्यापार है। जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर में अप्रैल २००७ में तेरहद्वीप पंचकल्याणक प्रतिष्ठा में आपने अपने पति के साथ माता-पिता बनने का सौभाग्य प्राप्त किया और ये पुण्यशाली दम्पत्ति आजन्म ब्रह्मचर्य व्रत ग्रहण कर सद्गृहस्थ का जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
श्री प्रकाशचन्द्र जैन
आपका जन्म चैत्र शुक्ला नवमी, सन् १९४५ को हुआ। आपका विवाह नेपालगंज-निकट बहराइच निवासी श्री जयकुमार जैन की सुपुत्री ज्ञानादेवी के साथ किया गया। आपके ४ पुत्र एवं ३ पुत्रियाँ हैं। सबसे छोटी पुत्री कु. इन्दू जैन पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी से आजन्म ब्रह्मचर्य व्रत लेकर आत्मसाधना में संलग्न हैं। आपके आठ पौत्र-पौत्री एवं एक नाती है।
सन् २००५ में अस्वस्थता के कारण आपका निधन हो गया।
आपके चारों पुत्र लखनऊ एवं टिवैâतनगर में कपड़ा, सर्राफा आदि व्यापारों में संलग्न हैं तथा अकलंक जैन नाम के सुपुत्र कुशल प्रतिष्ठाचार्य एवं विधानाचार्य हैं।
श्री सुभाषचन्द्र जैन
सन् १९४७ में आपका जन्म हुआ। विवाहयोग्य होने पर आपका विवाह गणेशपुर जि.-बाराबंकी (उ.प्र.) निवासी श्री कृष्णचंद्र जैन की सुपुत्री सुषमा जैन के साथ सम्पन्न हुआ। आपके दो पुत्र एवं चार पुत्रियाँ तथा दो पौत्र एवं छ: नाती-नातिन हैं।
आप कपड़ा-सर्राफा के व्यापारी हैं तथा पूरा परिवार सदैव धार्मिक क्रियाओं में संलग्न रहता है।
श्रीमती कुमुदनी जैन
आपका जन्म सन् १९४८ में हुआ। युवावस्था में आपका विवाह जायस निवासी श्री रिसबदास जैन के सुपुत्र श्री प्रकाशचंद जैन के साथ किया गया। आपके दो पुत्र एवं तीन पुत्रियाँ हैं। उनमें से एक पुत्री कु. बीना जैन पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी से आजीवन ब्रह्मचर्यव्रत लेकर संघ में आत्मकल्याण एवं ज्ञानाराधना में तत्पर हैं। आपके एक पौत्र एवं चार नाती-नातिन हैं। दोनों पुत्र व्यापार करते हैं तथा छोटे पुत्र विजय कुमार जैन कुशल विधानाचार्य एवं प्रवचनकार हैं।
सन् १९८४ में पति का आकस्मिक निधन हो जाने के बाद से आपका जीवन अत्यंत सादगीपूर्ण धर्मध्यान में व्यतीत होता है।
श्रीमती मालती जैन
आपका जन्म श्रावण कृ. ग्यारस, सन् १९५२ में हुआ। घर के धार्मिक संस्कारों के साथ-साथ पूज्य गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी से भी कई वर्ष आपको अनेक ग्रंथों के अध्ययन का लाभ प्राप्त हुआ तथा शास्त्री, धर्मालंकार उपाधि की परीक्षा देकर प्रथम श्रेणी में उत्तीर्णता प्राप्त की। आपका विवाह मोरीगेट-दिल्ली निवासी श्रावक श्री सतवीर जैन के सुुपुत्र श्री यशवीर जैन के साथ सम्पन्न हुआ। आपके एक पुत्र है। श्री यशवीर जैन कपड़े के व्यापारी हैं। दिल्ली बसंतकुंज में ‘‘रत्नत्रय शिक्षा शोध संस्थान’’ नामक संस्था का संचालन करते हुए सद्गृहस्थ के रूप में ये दम्पत्ति धार्मिक-सामाजिक क्रियाओं में तत्पर रहते हैं।
श्रीमती कामिनी जैन
आपका जन्म कार्तिक कृष्णा अमावस्या, सन् १९५५ में हुआ। युवावस्था में आपका विवाह दरियाबाद निवासी श्री सुखानंद जैन के सुपुत्र श्री जयप्रकाश जैन के साथ सम्पन्न हुआ। आपके दो पुत्र एवं तीन पुत्रियाँ हैं। एक पुत्री कु. सारिका जैन पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी से आजन्म ब्रह्मचर्य व्रत लेकर ज्ञानाराधना में लीन हैं। आपके १ पौत्री एवं २ नाती हैं।
श्री जयप्रकाश जी कपड़ा एवं सर्राफा के व्यापारी हैं।
श्रीमती त्रिशला जैन
आपका जन्म वैशाख शु. पंचमी, सन् १९६० में हुआ। आपका विवाह नाका हिंडोला चारबाग-लखनऊ निवासी श्री अनन्त प्रकाश जैन के सुपुत्र श्री चन्द्र प्रकाश जैन के साथ किया गया। आप माता मोहिनी देवी की अंतिम तेरहवीं संतान हैं।आपके दो पुत्र एवं १ पौत्री है। श्री चन्द्रप्रकाश जैन प्लाईवुड पैâक्ट्री का संचालन करते हुए दानादि क्रियाओं मेंं सदैव तत्पर रहते हैं।
त्रिशला जी को माँ से प्राप्त विरासती धार्मिक संस्कारों के साथ ही पूज्य गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी के मुखारविंद से धार्मिक अध्ययन करने का भी सौभाग्य बचपन में ही प्राप्त हुआ जिसके फलस्वरूप १२ वर्ष की उम्र में सोलापुर बोर्ड से शास्त्री परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण कर विद्वज्जगत को आश्चर्यचकित किया और विवाहोपरान्त भी आप साहित्यिक लेखन में संलग्न रहती हैं। रत्नकरंड श्रावकाचार, जीवनदान, जैन रामायण, श्री छोटेलाल शतक आदि को हिन्दी पद्य में प्रस्तुत किया है, जिनका प्रकाशन भी हो चुका है।