क्या है ? ऐसा प्रश्न होने पर वस्तु के स्वरूप का कथन करना निर्देश है, जैसे-चेतना लक्षण वाला जीव है।
किसका है ? ऐसा पूछने पर ‘अपना है’ इस आधिपत्य का कथन करना स्वामित्व है।
किनके द्वारा ? ऐसा प्रश्न होने पर ‘अपने द्वारा’ इस प्रकार से करण का निरूपण करना साधन है।
किसमें ? ऐसा प्रश्न होने पर ‘अपने में’ ऐसे आधार का प्रतिपादन करना अधिकरण है।
कितने काल तक ? ऐसा प्रश्न होने पर ‘अनंत काल पर्यंत’ ऐसे काल का प्ररूपण करना स्थिति है।
कितने प्रकार ? ऐसा प्रश्न होने पर जीव चैतन्य सामान्य से एक प्रकार का है इस प्रकार से प्रकार का कथन करना विधान है।
इस प्रकार से निर्देश आदि छह अनुयोगों का व्याख्यान किया है। मध्यम रुचि वाले शिष्यों के अभिप्राय के निमित्त से ये अनुयोग संभव होते हैं। विस्तार रुचि वाले शिष्यों के अभिप्राय से पुन: सत् आदि का व्याख्यान करते हैं।