श्री नाभिनन्दन! जिनाजित! संभवेश!,
देवाभिनंदनमुने! सुमते जिनेन्द्र!।
पद्मप्रभ! प्रणुतदेव सुपार्श्वनाथ!,
चन्द्रप्रभास्तु सततं मम सुप्रभातम्।।१।।
श्री पुष्पदंत! परमेश्वर शीतलेश!,
श्रेयान् जिनो विगतमान! सुवासुपूज्य!।
निर्दोषवाग्विमल! विश्वजनीनवृत्ति:,
श्रीमन्ननन्त! भवतान्मम सुप्रभातम्।।२।।
श्रीधर्मनाथ! गणभृन्नतशांतिनाथ!,
कुन्थो महेश परमार विभार मल्लि:।
सत्यव्रतेश! मुनिसुव्रत! सन्निमीश!
नेमि: पवित्र! सततं मम सुप्रभातम्।।३।।
श्रीपार्श्वनाथ! परमार्थ विदां वरेण्य!,
श्रीवर्धमान! हतमान! विमानबोध!।
युष्मत्पदद्वयमिदं स्मरतो ममास्तु,
वैâवल्यमस्तु विशदं मम सुप्रभातम्।।४।।