-आर्यिका चन्दनामती
तर्ज—चाँद मेरे आजा रे………..
आरती गणिनी माता की
दीपक जलाकर, थाली सजाकर, सब मिल करो आरतिया
आरती……………..।।टेक.।।
अज्ञान तिमिर नश जावे, निज ज्ञान किरण पा जाऊँ।
गणिनी माँ की आरति कर, भव आरत से छुट जाऊँ।।
आरती गणिनी माता की…….।।१।।
तीर्थंकर समवसरण की, जो गणिनी माताएँ हैं।
ब्राह्मी से चन्दनबाला, तक उनकी गाथाएँ हैं।।
आरती गणिनी माता की…….।।२।।
आचार्यों के सदृश ही, गणिनी माता होती हैं।
निजसंघ की शिष्याओं के, मिथ्या कल्मष धोती हैं।।
आरती गणिनी माता की…….।।३।।
कंचन का दीप जलाकर, वरदान यही मैं चाहूँ।
‘‘चंदनामती’’ निज आतम, में ज्ञान की ज्योति जलाऊँ।।
आरती गणिनी माता की…….।।४।।