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ज्ञानमती माँ को वंदन कर लो!
June 15, 2020
भजन
jambudweep
ज्ञानमती जी को वंदन
ज्ञानमती जी को वंदन कर लो, सबहिं पाप कट जावेंगे-२ ।। टेक.।।
मस्तक में अज्ञान भरा है, श्रुत का सार नहीं भाता।
गुरु चरणों में शीश झुका लो, सबहिं पाप कट जाएंगे।।१।।
कर्णेन्द्रिय को अब जिनवाणी, सुनने का अभ्यास नहीं।
ज्ञानमती जी का प्रवचन सुन लो, सबहिं पाप कट जाएंगे।।२।।
रंग बिरंगे रूप देखना, इन अँखियन को भाता है।
बालसती का तेज निरख लो, सबहिं पाप कट जाएंगे।।३।।
इत्र फुलेल सुगंधित द्रव्यों, को घ्राणेन्द्रिय चाह रही।
मात की ज्ञान सुरभि यदि पा लो, सबहिं पाप कट जाएंगे।।४।।
रसना रसीले व्यंजन खाने, और बोलने में नामी।
माता का ज्ञानामृत चख लो, सबहिं पाप कट जाएंगे।।५।।
मखमल के तकिये गद्दों पर, काया को सुख मिलता है।
वह काया यदि इन सम कर लो, सबहिं पाप कट जाएंगे।।६।।
पंचेन्द्रिय विषयों को इनने, छुआ नहीं देखा भी नहीं।
तभी ‘चंदनामति’ इन नमते, सबहिं पाप कट जाएंगे।।७।।
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