अन्वयार्थ – (वद-समि-दिदियरोधः) पाँच महाव्रत, पाँच समिति, पंचेन्द्रिय निरोध (लोचो ) लोच करना (आवासयं) षट् आवश्यक (अचेलं )वस्त्र मात्र का त्याग अर्थात् नग्नता (अण्हाणं) स्नान का त्याग (खिदि सयणं) भूमि शयन (अदंतवणं) दंत धवन नहीं करना (ठिदि-भोयणं) भूमि पर खड़े होकर भोजन करना (च) और (एयभत्तं) दिन में एक बार भोजन करना (खलु) निश्चय से (एदे) ये (समणाणं) मुनियों के (मूलगुणा) अट्ठाईस मूलगुण (जिणवरेहिं) जिनेन्द्र देव ने (पण्णत्ता) कहे हैं। (एत्थ) इन मूलगुणों में (पमाद कदादो) प्रमाद जनित (अइचारादो) अतिचारों से (अहं) मैं (णियत्तः) निवृत्त होता हूँ।
५. इच्छाविभाषण दोष-किसी श्रावक के यह पूछने पर कि हे मुनिवर । दीन हीन प्राणियों को दान देने से पुण्य होता है या नहीं-उस आवक की इच्छानुसार उत्तर देना इच्छाविभाषण दोष है।