(प्रभाकर द्वारा मान्य प्रमाण का खंडन)
(प्रभाकर द्वारा मान्य प्रमाण का खंडन) प्रभाकर-ज्ञाता का व्यापार ही प्रमाण है। जैन-प्रश्न यह होता है कि वह ज्ञाता का व्यापार ज्ञानात्मक है या अज्ञानात्मक। यदि वह ज्ञानात्मक है तब तो बात ठीक ही है। पुन: वही ज्ञान ही प्रमाण सिद्ध हो जाता है। यदि आप उसे अज्ञानस्वरूप कहेंगे तब तो वहाँ संशयादि को दूर…