चारित्रचक्रवर्ती प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की पूजन
चारित्रचक्रवर्ती प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की पूजन -स्थापना- पूजन करो रे, श्रीशान्तिसिन्धु आचार्य प्रवर की, पूजन करो रे-२। भारतवसुन्धरा ने जब, मुनियों के दर्श नहिं पाये। सदी बीसवीं में तब श्री, चारित्रचक्रवर्ती आए।। दक्षिण भारत भोजग्राम ने, एक लाल को जन्म दिया। उसने ही सबसे पहले, मुनिपरम्परा जीवन्त किया।। मुनिपरम्परा जीवन्त किया।। पूजन करो…