(सांख्य द्वारा मान्य अभेदैकांत पक्ष का खंडन)
(सांख्य द्वारा मान्य अभेदैकांत पक्ष का खंडन) सांख्य-हमारे द्वारा मान्य अभेद एकांत में प्रकृति आदि तत्त्व प्रमेय बन जाते हैं क्योंकि सर्वत्र आविर्भाव-तिरोभाव के निमित्त से प्रधान का परिणाम संभव है। जैन-यह आपका कथन भी असंगत है क्योंकि अभेदरूप एकांत के मानने पर तो आविर्भाव और तिरोभाव ही असंभव है, पुन: किससे परिणाम होगा। प्रकृति…