प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव का जीवन दर्शन
प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव का जीवन दर्शन जन्मभूमि -अयोध्या (उत्तर प्रदेश) पिता -महाराज नाभिराय माता -महारानी मरुदेवी वर्ण -क्षत्रिय वंश -इक्ष्वाकु देहवर्ण -तप्त स्वर्ण सदृश चिन्ह -बैल…
प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव का जीवन दर्शन जन्मभूमि -अयोध्या (उत्तर प्रदेश) पिता -महाराज नाभिराय माता -महारानी मरुदेवी वर्ण -क्षत्रिय वंश -इक्ष्वाकु देहवर्ण -तप्त स्वर्ण सदृश चिन्ह -बैल…
श्री भरत स्वामी स्तुति: (सप्तविभक्ति समन्वित) -गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी श्रीभरतश्चक्रवर्ती, त्वं षट्खंडाधिनायक:। श्रीभरतेश्वरं नौमि, भेदविज्ञानप्राप्तये।।१।। भरतेश्वरेण दीक्षा-क्षणात् कैवल्य-माप्तवान्। श्रीभरतेश्वराय मे, नमो नमोस्त्वनंतश:।।२।। भरतात् भारतं वर्षं, पुराणेषु प्रकीर्त्यते। भरतस्य विरक्तिस्तु, गार्हस्थ्येऽपि प्रसिद्ध्यति।।३।। श्री भरतेश्वरे भक्ति:, सदा मे स्याद् भवे भवे। भो! भरतेश! स्वामिन्! त्वं, भेदज्ञानं प्रयच्छ मे।।४।।
श्री ऋषभदेव स्तुति: (सप्तविभक्ति समन्वित) -गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी -अनुष्टुप् छंद:- प्रभु: ऋषभदेवस्त्वं, जगत्सृष्टा जगद्गुरू:। ऋषभदेवमानौमि, सर्वसिद्धिप्रदायकम्।।१।। हत: ऋषभदेवेन, स्वकर्मनिचय: स्वयं। नम: ऋषभदेवाय, धर्मतीर्थप्रवर्तिने।।२।। तीर्थं ऋषभदेवाद् हि, स्वर्गमोक्षविधायकम्। धर्म: ऋषभदेवस्य, साधुगृहि-द्विभेदत:।।३।। भक्तिं ऋषभदेवेऽहं, करोमि सर्वसौख्यदाम्। ऋषभदेव! मां रक्ष, निमज्जंतं भवाम्बुधौ।।४।।
अनादिनिधन णमोकार मंत्र एवं चत्तारि मंगल पाठ णमो अरिहंताणं, णमो सिद्धाणं, णमो आइरियाणं। णमो उवज्झायाणं, णमो लोए सव्व साहूणं।। चत्तारि मंगलं-अरिहंत मंगलं, सिद्ध मंगलं, साहु मंगलं, केवलि पण्णत्तो धम्मो मंगलं। चत्तारि लोगुत्तमा-अरिहंत लोगुत्तमा, सिद्ध लोगुत्तमा, साहु लोगुत्तमा, केवलिपण्णत्तो धम्मो लोगुत्तमा। चत्तारि सरणं पव्वज्जामि-अरिहंत सरणं पव्वज्जामि, सिद्ध सरणं पव्वज्जामि, साहु सरणं पव्वज्जामि, केवलि पण्णत्तो धम्मो सरणं…
श्री चक्रवर्ती भरत सिद्धपरमेष्ठी विधान 1. भगवान श्री ऋषभदेव जिनपूजा 2. श्री चक्रवर्ती भरत सिद्धपरमेष्ठी विधान मंगलाचरण-श्री भरत स्वामी की स्तुति 3. श्री चक्रवर्ती भरत सिद्धपरमेष्ठी पूजा 4. अथ प्रत्येक अर्घ्य (१०८ अर्घ्य) 5. १ पूर्णार्घ्य, जयमाला 6. प्रशस्ति 7. श्री ऋषभदेव स्तुति: (सप्तविभक्ति समन्वित) 8. ह्री ँकार स्तुति (सप्तविभक्ति समन्वित) 9. श्री भरतस्वामी का…
श्री भरत स्वामी की मंगल आरती रचयित्री-आर्यिका चंदनामती श्री भरत प्रभू की आरती उतारो मिलके, उतारो मिलके, सभी उतारो मिलके।।टेक.।। प्रथम चक्रवर्ती इस युग के, पुत्र प्रथम वृषभेश प्रभू के। उनके त्याग और तप, उनके त्याग व तप को शीश झुकाओ मिलके, शीश झुकाओ मिलके, श्री भरत प्रभू की आरती उतारो मिलके।।१।। मात यशस्वति धन्य…
भजन रचयित्री-आर्यिका चंदनामती राजधानी दिल्ली से गूंज उठा नाद, भरत जी का भारत है करो सब याद। यही कहने आई हैं-माँ ज्ञानमती, सारे जग में छाई हैं-माँ ज्ञानमती।। जैन एवं वैदिक शास्त्रों में है ऐसा बताया। प्रभु ऋषभदेव के सुत भरत जी में है भारत समाया।। भरत जी घर में वैरागी थे, निज आत्मा के…
भजन रचयित्री-आर्यिका चंदनामती तर्ज—देख तेरे संसार की हालत…….. ऋषभदेव के पुत्र भरत का भारत देश महान, जय जय भरत सिद्ध भगवान।।टेक.।। यशस्वती माता के नन्दन। आदिनाथ सुत भरत को वन्दन।। प्रथम चक्रवर्ती भरतेश्वर का था त्याग महान, जय जय भरत सिद्ध भगवान।।१।। छह खंडों की वसुधा जीती। आत्मदृष्टि फिर भी थी भरत की।। तभी उन्हें…
भजन रचयित्री-आर्यिका चंदनामती तर्ज—है प्रीत जहाँ की रीत सदा…… प्रभु ऋषभदेव के पुत्र भरत से, भारतदेश सनाथ हुआ। यह आर्यावर्त इण्डिया हिन्दुस्तान नाम से सार्थ हुआ।। टेक.।। यहाँ तीर्थंकर प्रभु लार्ड गॉड, साधूजन सेन्ट कहाते हैं। हो…… यहाँ गुलदस्ते की भांति कई, जाती व पंथ आ जाते हैं।। हो…… चैतन्य तत्त्व की प्राप्ती का-२, संचालित…
भगवान भरत भक्ति आराधना रचयित्री-आर्यिका चंदनामती -बसंततिलका छंद- भगवान श्री भरत हैं भारत के स्वामी। तीर्थेश श्री ऋषभदेव पथानुगामी।। चक्रीश प्रभु भरत के पद में नमूँ मैं। सम्पूर्ण शांतिहित मंगल ध्वनि करूँ मैं।।१।। तेजस्वि पुत्र हो मात यशस्वती के। ओजस्वि भ्रात हो श्रेष्ठ सुबाहुबलि के।। चक्रीश प्रभु भरत के पद में नमूँ मैं। सम्पूर्ण शांतिहित…