श्रीसिद्ध गुण स्तोत्र
श्रीसिद्ध गुण स्तोत्र (१) -दोहा- प्रभु अनंत गुण के धनी, शुद्ध सिद्ध भगवंत। मुख्य आठ गुण को नमूँ, पाऊं भवदधि अंत।।१।। (तर्ज-आवो बच्चों तुम्हें दिखायें……) आओ हम सब करें वंदना, सिद्धचक्र भगवान की। सिद्धशिला पर राज रहें जो, उन अनंत गुणखान की।। सिद्धों को नमन, सिद्धों को नमन, सिद्धों को नमन, सिद्धों को नमन।।१।। दर्शनमोहनीय…