नन्दीश्वरद्वीप जिनालय वंदना-1
नन्दीश्वरद्वीप जिनालय वंदना-1 -दोहा- चिन्मूरति परमात्मा, चिदानंद चिद्रूप। जिनगुण का वंदन करूँ, स्वल्पज्ञान अनुरूप।।१।। चाल-हे दीनबंधु……….. जय आठवाँ जो द्वीप नाम नंदिश्वरा है। जय बावनों जिनालयों से पुण्यधरा है। इक सौ तिरेसठ करोड़ लाख चुरासी। विस्तार इतने योजनों से द्वीप विभासी।।२।। चारों दिशा के बीच में अंजनगिरी कहा। जो इंद्रनील मणिमयी रत्नों से बन रहा।।…