श्री चन्द्रप्रभ स्तोत्र
श्री चन्द्रप्रभ स्तोत्र उपस्थिता छन्द:-(११ अक्षरी) संसार-वने भ्रमता हि देवेट्। लेशोऽपिसुखं नहि लब्धमेव। त्वं वेत्सि च मेऽखिलदु:खमाप्तं, चन्द्रप्रभ! मामवतात्त्वरं वै।।१।। एकरूप छन्द:-(११ अक्षरी) काश्यां चंद्रपुरे सुरत्नवृष्ट्या, पृथ्वी धन्यवती जनाश्च धन्या:। पित्रोर्हर्षमवर्धयन् हि चैत्रे, पंचम्या-मसितेऽवसत् स गर्भे।।२।। इन्द्रवङ्काा छन्द:-(११ अक्षरी) जन्माभिषेक: सुरशैलमूर्घ्नि, जात: प्रभोश्चन्द्रजिनस्य यस्यां। सैकादशी मे भव पौषकृष्णा, सू: लक्ष्मणा मंगलदायिनी च।।३।। उपेन्द्रवङ्काा छन्द:-(११ अक्षरी)…