श्री मुनिसुव्रतनाथ वन्दना
श्री मुनिसुव्रतनाथ वन्दना -दोहा- अखिल अमंगल को हरें, श्रीमुनिसुव्रत देव। मेरे कर्मांजन हरें, नित्य करूँ मैं सेव।।१।। -सखी छंद- जय जय जिनदेव हमारे, जय जय भविजन बहुतारे। जय समवसरण के देवा, शत इन्द्र करें तुम सेवा।।२।। जय मल्लि प्रमुख गणधरजी, सब अठरह गणधर गुरु जी। जय तीस हजार मुनीश्वर, रत्नत्रय भूषित ऋषिवर।।३।। जय गणिनी सुपुष्पदंता,…