श्री पुष्पदंतनाथ वन्दना
श्री पुष्पदंतनाथ वन्दना -गीता छंद- श्री पुष्पदंतनाथ जिनेन्द्र त्रिभुवन, अग्र पर तिष्ठें सदा। तीर्थेश नवमें सिद्ध हैं, शतइन्द्र वंदे सर्वदा।। चउज्ञानधारी गणपती, प्रभु आपके गुण गावते। हम सभी यहाँ वंदन करें, प्रभु भक्ति से शिर नावते।।१।। -रोला छंद- अहो! जिनेश्वर देव! सोलह भावन भाया। प्रकृती अतिशय पुण्य, तीर्थंकर उपजाया।। पंचकल्याणक ईश, हो असंख्य जन तारे।…