चारित्रचक्रवर्ती प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर मुनिराज एवं परम्पराचार्यों के अर्घ्य (लघु)
चारित्रचक्रवर्ती प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर मुनिराज एवं परम्पराचार्यों के अर्घ्य (लघु) शांतिसिंधु आचार्य थे, युग के प्रथमाचार्य। उनके पद में भाव से, अर्पण है पूर्णार्घ्य।।१।। ॐ ह्रीं चारित्रचक्रवर्ती प्रथमाचार्यश्रीशांतिसागरमहामुनीन्द्राय अर्घ्यं निर्वपामीति स्वाहा। शांतिसिंधु के शिष्य तुम, प्रथम हो पट्टाचार्य। इनके चरणों में नमन कर अर्पूं मैं पूर्णार्घ्य।।२।। ॐ ह्रीं चारित्रचक्रवर्तीप्रथमाचार्यश्रीशांतिसागरस्य मूलपरम्परायां प्रथमपट्टाचार्यश्रीवीरसागरमुनीन्द्राय अर्घ्यं निर्वपामीति स्वाहा। वीर…