अनुबद्ध केवली अर्घ्य
अनुबद्ध केवली अर्घ्य अनुक्रम केवलि मुक्तिपद, प्राप्त स्वर्ग पद प्राप्त। पुष्पांजलि से पूजते, मिटे सकल भवताप।।१।। अथ मंडलस्योपरि पुष्पांजलिं क्षिपेत्। —चामर छंद— आदिनाथ के चुरासि आनुबद्ध केवली। स्वात्म सौख्य दे सके इन्हों कि भक्ति एकली।। इष्ट का वियोग ना अनिष्ट का संयोग ना। पूजते इन्हें सदैव सर्व सौख्य हो घना।।१।। ॐ ह्रीं श्रीऋषभदेवस्य चतुरशीति-अनुबद्धकेवलिभ्य: अर्घ्यं…