भजन
भजन (गुरुओं के आहार के पश्चात् बोलने वाला भजन) तर्ज—चाँद मेरे आजा…… मेरे मन खुशियाँ छाई हैं, आहार देकर मन में मेरे, गुरुभक्ती समाई है। मेरे मन……।।टेक.।। प्रभु ऋषभ ने इस धरती पर, पहला आहार लिया था। हस्तिनापुरी के राजा, श्रेयांस ने उन्हें दिया था।। याद वह घड़ियाँ आई हैं, आहार देकर मन में मेरे,…