भजन
भजन…. तर्ज—जिंदगी प्यार का गीत है…… ये तो जिनवर का दरबार है, यहाँ भक्ती ही करना पड़ेगा। प्रभु के पद में ही शिवद्वार है, उस पे क्रम से ही चलना पड़ेगा।।टेक.।। देवपूजा गुरूपास्ति कर, फिर है स्वाध्याय संयम व तप। दान ये मिलके षट्कार्य हैं, इन्हें श्रावक को करना पड़ेगा।।१।। देशव्रत अरु महाव्रत को भी,…