मंगलाचरण
मंगलाचरण… -उपेंद्रवज्राछंद- संसारवार्धौ विनिमग्नजंतून्, उद्धृत्य यो मोक्षपदे धरन् हि। कृपापरस्तं प्रभुकुंथुनाथं, नमामि भक्त्या परया मुदा च।।१।। -शंभु छंद- जितने भी पुद्गल इस जग में, सबको भोगा छोड़ा मैंने। अब सब उच्छिष्ट सदृश मुझको, हा फिर भी ममता है इनमें।। नभ के प्रत्येक प्रदेशों को, मैं जन्म—मरण से पूर्ण किया। त्रिभुवन में जी भर घूम चुका,…