श्री ऋषभदेव विधान (लघु)
श्री ऋषभदेव विधान (लघु) मंगलाचरण श्री ऋषभदेव पूजा प्रथम कोष्ठक पूजा द्वितीय कोष्ठक पूजा तृतीय कोष्ठक पूजा चतुर्थ कोष्ठक पूजा पंचम कोष्ठक पूजा जयमाला श्री ऋषभदेव विधान की प्रशस्ति आरती भजन
श्री ऋषभदेव विधान (लघु) मंगलाचरण श्री ऋषभदेव पूजा प्रथम कोष्ठक पूजा द्वितीय कोष्ठक पूजा तृतीय कोष्ठक पूजा चतुर्थ कोष्ठक पूजा पंचम कोष्ठक पूजा जयमाला श्री ऋषभदेव विधान की प्रशस्ति आरती भजन
भजन…. तर्ज—…… नाम तिहारा तारनहारा कब तेरा दर्शन होगा। तेरी प्रतिमा इतनी सुन्दर तू कितना सुन्दर होगा।। जाने कितनी माताओं ने कितने सुत जन्में हैं। पर इस वसुधा पर तेरे सम कोई नहीं बने हैं।। पूर्व दिशा में सूर्य देव सम सदा तेरा सुमिरन होगा। तेरी प्रतिमा इतनी सुन्दर, तू कितना सुन्दर होगा।।१।। पृथ्वी के…
आरती….. प्रभु आरति करने से, सब आरत टलते हैं। जनम-जनम के पाप सभी, इक क्षण में टलते हैं। मन-मंदिर में ज्ञानज्योति के दीपक जलते हैं।।प्रभु.।।टेक.।। श्री ऋभषदेव जब जन्में-हां-हां जन्में, कुछ क्षण को भी शांति हुई नरकों में। स्वर्गों से इन्द्र भी आए….हां-हां आए, प्रभु जन्मोत्सव में खुशियां खूब मनाएं।। ऐसे प्रभु की आरति से,…
श्री ऋषभदेव विधान की प्रशस्ति —दोहा— ऋषभदेव से वीर तक, तीर्थंकर चौबीस। भक्तिभाव से नित्य मैं, नमूँ नमाकर शीश।।१।। तीर्थ अयोध्या को नमूँ, जन्मभूमि से ख्यात। हुये अनंतानंत भी, यहीं तीर्थकर नाथ।।२।। वीर निर्वृति पच्चीस सौ, उन्निस का शुभ योग। तीर्थ अयोध्या में किया, मैंने वर्षायोग।।३।। शरद पूर्णिमा दिन वृहत्, ऋषभदेव सुविधान। दो सौ चार…
जयमाला……. -दोहा- अति अद्भुत लक्ष्मी धरें, समवसरण प्रभु आप। तुम ध्वनि सुन भविवृंद नित, हरें सकल संताप।।१।। -शंभु छंद- जय ऋषभदेव जिन का वैभव, अंतर का अनुपम गुणमय है। जो दर्शज्ञान सुख वीर्यरूप, आनन्त्य चतुष्टय गुणमय है।। बाहर का वैभव समवसरण, जिसमें असंख्य रचना मानी। गुरु गणधर भी वर्णन करते, थक जाते मनपर्यय ज्ञानी।।२।। यह…
पंचम कोष्ठक पूजा (अष्टकर्म क्षय सम्बन्धी ८ अर्घ्य) -दोहा- प्रभु अनंत गुण के धनी, शुद्ध सिद्ध भगवंत। मुख्य आठ गुण को नमूँ, पुष्पांजलि विकिरंत।। अथ मण्डलस्योपरि पञ्चम कोष्ठकस्थाने पुष्पांजलिं क्षिपेत्। तर्ज—आवो बच्चों तुम्हें दिखायें… आओ हम सब करें अर्चना, ऋषभदेव भगवान की। सिद्ध शिला पर राज रहे जो, उन अनंत गुणखान की।। जय जय आदिजिनं,…
चतुर्थ कोष्ठक पूजा (चौबीसविध संकट निवारक २४ अर्घ्य) -दोहा- वर्तमान के बहुत विध, कष्ट स्वयं हो दूर। पुष्पांजलि से पूजते, मिले सौख्य भरपूर।। अथ चतुर्थकोष्ठकस्थाने मण्डलस्योपरि पुष्पांजलिं क्षिपेत्। -शेर छंद- जब मेघ अतीवृष्टि से भू जलमयी करें। नदियों की बाढ़ में बहें जन डूबकर मरें।। जो भक्त आप पूजतें वे पुण्य योग से। अतिवृष्टि अपने…
तृतीय कोष्ठक पूजा (अनंत चतुष्टय के ४ अर्घ्य) —दोहा— अनंत चतुष्टय के धनी, ऋषभदेव भगवान। मण्डल पर पुष्पाञ्जली, करूँ प्रभू गुणगान।। अथ मंडलस्योपरि तृतीय कोष्ठकस्थाने पुष्पांजलि क्षिपेत्। -नाराच छंद- तीनलोक तीनकाल की समस्त वस्तु को। एक साथ जानता अनंत ज्ञान विश्व को।। जो अनन्तज्ञान युक्त इन्द्र अर्चते जिन्हें। पूजहूँ सदा उन्हें अनन्तज्ञान हेतु मैं।।१।। ॐ…
द्वितीय कोष्ठक पूजा (अष्ट प्रातिहार्य के ८ अर्घ्य) —दोहा— आठ प्रातिहार्यों सहित, श्री अरिहंत जिनेश। पुष्पांजलि कर पूजहूँ, ऋषभदेव परमेश।। अथ मण्डलस्योपरि द्वितीय कोष्ठकस्थाने पुष्पांजलिं क्षिपेत्। -गीता छंद- वर प्रातिहार्य सु आठ में, तरुवर अशोक विराजता। मरकत मणी के पत्र पुष्पों, से खिला अतिभासता।। वृषभेश की ऊँचाई से, बारह गुणे तुंग फरहरे। इस युत प्रभू…
प्रथम कोष्ठक पूजा (३४ अतिशय के ३४ अर्घ्य) -सोरठा— जिनवर गुणमणि तेज, सर्वलोक में व्यापता। हो मुझ ज्ञान अशेष, पुष्पांजलि कर पूजहूँ।। अथ मंडलस्योपरि प्रथमकोष्ठकस्थाने पुष्पांजलिं क्षिपेत्। -शंभु छंद- श्री आदिनाथ के जन्म समय से, दश अतिशय सुखदाता हैं। उनके तनु में निंह हो पसेव, यह अतिशय गुण मन भाता है।। मैं पूजूँ इस अतिशययुत…