श्री सुपार्श्वनाथ स्तुति
श्री सुपार्श्वनाथ स्तुति….. —शंभु छंद— प्रभु पास नहीं िंकचित् संग है, अतएव राग का लेश नहीं। आयुध के पास न होने से, प्रभु तुम में िंकचित् द्वेष नहीं।। तव वाणी दिव्या सत्य सुखद, अतएव दोष लवलेश नहीं। तुमको प्रणमूँ सर्वज्ञ प्रभो ! जिन हे सुपार्श्व! जगवंद्य सही।।१।। हरिताभ तनु फिर भी तनु से, विरहित अशरीरी…