बड़ी जयमाला
“….बड़ी जयमाला….” —सोरठा— अकृत्रिम जिनधाम, अतुलविभव को कह सके। प्रणमूँ आठों याम, गुणमणिमाला कंठ धर।।१।। —चाल-हे दीनबंधु………. जय जयतु जंबूवृक्ष के शाश्वत जिनालया। जय जयतु शाल्मलीतरु के जैन आलया।। जय जयतु धातकी तरू के जैनधाम दो। जय जयतु शाल्मली तरू के जैनधाम दो।।२।। जय जयतु जय पुष्कर तरू के दो जिनालया। जय जयतु शाल्मली तरू…