समवसरण चैत्यप्रासाद भूमि स्तोत्र
“…समवसरण चैत्यप्रासाद भूमि स्तोत्र…” —गीता छंद— तीर्थंकरों की सभा भूमी, धनपती रचना करें। है समवसरण सुनाम उसका, वह अतुल वैभव धरे।। जो घातिया को घातते, वैâवल्यज्ञान विकासते। वे इस सभा के मध्य अधर, सुगंधकुटि पर राजते।।१।। —नरेन्द्र छंद— चैत्य प्रासाद नाम भू पहली, धूलिसाल अभ्यंतर। पाँच पाँच प्रासाद एक इक, जिनमंदिर के अंतर।। तीर्थंकर ऊँचाई…