आवर्त का स्वरूप
आवर्त का स्वरूप….. कथिता द्वादशावर्ता वपुर्वचनचेतसाम्। स्तवसामायिकाद्यन्तपरावर्तनलक्षणा:।।१३।। अर्थात्-मन, वचन और काय के पलटने को आवर्त कहते हैं। ये आवर्त बारह होते हैं जो सामायिकदण्डक के प्रारम्भ और समाप्ति में तथा चतुर्विंशतिस्तवदण्डक के प्रारम्भ और समाप्ति के समय किये जाते हैं। जैसे-‘‘णमो अरहंताणं’’ इत्यादि सामायिक दण्डक के पहले क्रिया विज्ञापनरूप मनोविकल्प होता है उस मनोविकल्प को…