उषा वंदना (लघु)
उषा वंदना (लघु) रचयित्री-गणिनी आर्यिका ज्ञानमती उठो भव्य! खिल रही है उषा, तीर्थ वंदना स्तवन करो। आर्तरौद्र दुर्ध्यान छोड़कर, श्री जिनवर का ध्यान करो।।१।। अष्टापद से ऋषभदेव जिन, वासुपूज्य चम्पापुर से। ऊर्जयन्त से श्री नेमीश्वर, मुक्ति गये वंदों रुचि से।।२।। पावापुरी सरोवर से इस, उषा काल में श्री महावीर। विधुत क्लेश निर्वाण गये हैं, नमो…