(ज्ञान स्वसंवेदी भी हैं)
(ज्ञान स्वसंवेदी भी हैं) शंका-बाह्य पदार्थों के अवलंबन लेने से ही ज्ञान के ये भेद संभव हैं। अत: ज्ञान स्वव्यवसायात्मक-स्व को जानने वाला वैâसे होगा ? समाधान-ऐसी बात नहीं है। ये भेद स्वसंवेदन के होते हैं। कारिका में ‘स्वसंविदाम्’ पद है। पुन: यहाँ पर ‘अपि’ शब्द का अध्याहार करना चाहिए। तब ऐसा अर्थ निकलता है…