श्रावक धर्म अधिकार
श्रावक धर्म अधिकार चारित्र के दो भेद— जिणणाणदिट्ठिसुद्धं, पढमं सम्मत्तचरणचारित्तं। विदियं संजमचरणं, जिणणाणसदेसियं तं पि।१६।। (चारित्रपाहुड़ गाथा-५) शंभु छन्द— सम्यक्त्वचरण चारित्र प्रथम, श्री जिनवर ने उपदेशा है। जो सम्यग्दर्शन और ज्ञान, से शुद्ध चरित निर्देशा है।। दूजा है संयमचरण चरित जो, सकल-विकल द्वयरूप कहा। जिनज्ञान देशना से विकसित, चरणानुयोग में यही कहा।।१६।। अर्थ—जिनेन्द्रदेव भाषित ज्ञान-दर्शन…