तत्त्वार्थसूत्र भाषा
तत्त्वार्थसूत्र भाषा [ श्री लाला छोटेलालजी कृत] छप्पय – तीनकाल षद्रव्य पदारथ नव सरधानो । जीवकाय षट जान लेश्या षट ही मानो ॥ अस्तिकाय हैं पांच और व्रत समिति सुगत हैं। ज्ञान और चारित्र इसे श्रुत मोक्ष कहत हैं। तीन भुवनमें महत पुनि, अरहत ईश्वर जानियो। ये प्रशस्त पुनि मान्य हैं, शुद्धदृष्टि पहिचानियो ।। १…