सप्तपरमस्थान पूजा
सप्तपरमस्थान पूजा -गीता छंद- श्री वीतराग जिनेन्द्र को, प्रणमूँ सदा वर भाव से। श्री सप्तपरमस्थान पूजूँ, प्राप्ति हेतू चाव से।। आह्वान थापन सन्निधापन, भक्ति श्रद्धा से करूँ। सज्जाति से निर्वाण तक, पद सप्त की अर्चा करूँ।।१।। ॐ ह्रीं सप्तपरमस्थानसमूह! अत्र अवतर अवतर संवौषट् आह्वाननं। ॐ ह्रीं सप्तपरमस्थानसमूह! अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठ: ठ: स्थापनं। ॐ ह्रीं…