६ भोग भूमि
६ भोग भूमि हैमवत और हैरण्यवत क्षेत्र में जघन्य भोगभूमि, हरि और रम्यक क्षेत्र में मध्यम भोगभूमि एवं विदेह के देवकुरु उत्तरकुरु में उत्तम भोगभूमि की व्यवस्था है।
६ भोग भूमि हैमवत और हैरण्यवत क्षेत्र में जघन्य भोगभूमि, हरि और रम्यक क्षेत्र में मध्यम भोगभूमि एवं विदेह के देवकुरु उत्तरकुरु में उत्तम भोगभूमि की व्यवस्था है।
१७० म्लेच्छ खंड प्रत्येक ३४ कर्मभूमि क्षेत्र संबंधी ५-५ म्लेच्छ खंड होने से ३४²५·१७० म्लेच्छ खंड हैं। इनमें जो मनुष्य हैं उनके आचार-विचार क्षत्रियोचित हैं, किन्तु संस्कार और धर्म से रहित हैं और म्लेच्छखंड में जन्म लेने से क्षेत्र म्लेच्छ हैं इसलिये ये म्लेच्छ कहलाते हैं।
६८ विद्याधर श्रेणियाँ भरत, ऐरावत और बत्तीस विदेह इनमें बीचों-बीच में एक-एक विजयार्ध है उन विजयार्धों में दक्षिण-उत्तर दोनों तरफ विद्याधर श्रेणियाँ हैं। इनमें भरत क्षेत्र के विजयार्ध के दक्षिण में ५० नगरी एवं उत्तर में ६० नगरियाँ हैं। ऐसे ही ऐरावत के विजयार्ध के दक्षिण में ६० और उत्तर में ५० नगरियाँ हैं। विदेह…
३४ कर्मभूमि भरत, ऐरावत और विदेह के प्रत्येक के एक-एक आर्यखंड हैं उन्हीं में कर्मभूमि की व्यवस्था है। अत: ३४ कर्मभूमि हैं।
बत्तीस विदेह विदेह के बीचों-बीच में सुमेरु पर्वत है इसलिये पूर्व पश्चिम विदेह से दो भेद हुये हैं क्योंकि दक्षिण उत्तर में देवकुरु-उत्तरकुरु है। एवं नील निषध से सीता सीतोदा नदी ने निकल कर पूर्व पश्चिम में विदेह के दो-दो टुकड़े कर दिये। पुन: सोलह वक्षार और १२ विभंगा नदियों से इन ४ विदेह के…
सात क्षेत्र भरत, हैमवत, हरि, विदेह, रम्यक, हैरण्यवत और ऐरावत ये मुख्य सात क्षेत्र हैं। इनमें भरत का विस्तार ५२६-६/१९ योजन है आगे-आगे चौगुणे-चौगुणे हैं। विदेह के आगे की व्यवस्था दक्षिण के सदृश है। हैमवत हैरण्यवत में जघन्य भोगभूमि, हरि, रम्यक में मध्यम भोगभूमि एवं विदेह के देवकुरु उत्तरकुरु में उत्तम भोगभूमि है। भरत ऐरावत…
जम्बूद्वीप में वेदियाँ और उपवन खंड जम्बूद्वीप में तीन सौ ग्यारह पर्वत हैं। उनकी उतनी ही मणिमयी वेदी हैं अर्थात् ६ कुलाचल, ३४ विजयार्ध १६ वक्षार और ४ गजदंत। इन पर्वतों के दोनों पार्श्व भागों में मणिमयी वेदी हैं बाकी के कांचनगिरि, यमकगिरि, आदि पर्वत गोल हैं अत: इनके चारों तरफ वेदी हैं। छब्बीस सरोवर…
परिवार नदियाँ गंगा-सिंधु, रक्ता-रक्तोदा १४०००²४·५६००० रोहित्-रोहितास्या, सुवर्ण, रुप्यकूला, २८०००²४·११२००० हरित्, हरिकांता, नारी-नरकांता ५६०००²४·२२४००० सीता, सीतोदा ८४०००²२·१६८००० विभंगा नदी १२ हैं उनकी परिवार नदी २८०००²१२·३३६००० गंगा, सिंधु, रक्ता, रक्तोदा, ६४ हैं इनकी १४०००²६४·८९६००० ५६०००±११२०००±२२४०००±१६८०००±३३६०००±८९६०००·१७९२००० परिवार नदी हैं। इनमें मुख्य ९० नदी मिलाने से १७९२०००±९०·१७९२०९० नदियाँ जम्बूद्वीप में हैं।
प्रमुख नदियाँ गंगा सिंधु आदि १४, विभंगा नदी १२, विदेह की गंगा सिंधु आदि ३२ एवं रक्ता रक्तोदा ३२, १४±१२±६४·९० नदियाँ हैं।
छब्बीस सरोवर कुलाचलों पर पद्म, महापद्म आदि ६ सीता नदी के १० और सीतोदा नदी के १०, ऐसे ६±१०±१०·२६ सरोवर हैं।