सम्यग्दर्शन की महिमा
सम्यग्दर्शन की महिमा भव्यात्माओं! आचार्यों ने कहा है- न सम्यक्त्व समं किञ्चित्, त्रैकाल्ये त्रिजगत्यपि। श्रेयो श्रेयश्च मिथ्यात्व-समं नान्यत् तनु भृताम्।। संसार में सम्यक्त्व के समान तीनों लोकों में और तीनों कालों में कोई हित करने वाला श्रेयस्कर, उत्तम, श्रेष्ठ नहीं है और मिथ्यात्व के समान प्राणियों के लिए संसार में कोई अकल्याणकारी, शत्रु, अहितकारी नहीं…