छठी अध्याय का भजन
छठी अध्याय का भजन हे वीतराग सर्वज्ञ देव! तुम हित उपदेशी कहलाते। तव गुणमणि की उपलब्धि हेतु, हम भी प्रभु तेरे गुण गाते।।टेक.।। तत्त्वार्थसूत्र षष्ठम अध्याय में, गुरु ने आश्रव तत्त्व कहा। आत्मा में कर्मों का आना ही, समझो आश्रव तत्त्व रहा।। तीनों योगों के द्वारा वे, शुभ-अशुभरूप हैं बन जाते। तव गुणमणि की उपलब्धि…