परम समाधि अधिकार
परम समाधि अधिकार वंशस्थ– समाधिना केनचिदुत्तमात्मनां हृदि स्फुरन्तीं समतानुयायिनीम्। यावन्न विद्म: सहजात्मसंपदं न मादृशां या विषया विदामहि।।२००।। अर्थ-किसी (एक अद्वितीय परम) समाधि के द्वारा उत्तम आत्माओं (उत्तम अंतरात्माओं) के हृदय में स्फुरायमान होती हुई, समताभाव की अनुयायिनी ऐसी सहज आत्मसंपत्ति का जब तक हम अनुभव नहीं करते हैं तब तक हम जैसे साधुओं के लिए…