बाहुबली के शल्य नहीं थी
बाहुबली के शल्य नहीं थी इधर बाहुबली भगवान एक वर्ष का योग लेकर ध्यान में खड़े थे। उस समय उनके ध्यान के प्रभाव से मन:पर्ययज्ञान और अनेक ऋद्धियाँ प्रगट हो गई थीं। यदि बाहुबली को शल्य होती, तो मन:पर्ययज्ञान और ऋद्धियाँ नहीं हो सकती थीं…..। उन्हें मात्र विकल्प था कि- संक्लिष्टो भरताधीश:, सोऽस्मत्त इति यत्किल।…