तेरहद्वीप पूजा
“…तेरहद्वीप पूजा…” -गणिनी ज्ञानमती -दोहा- स्वयंसिद्ध ये द्वीप हैं, तेरहद्वीप महान। सब द्वीपों में जिनभवन, अनुपम रत्न निधान।।१।। चउ शत अट्ठावन यहाँ, जिनमंदिर अभिराम। तीर्थंकर जिन केवली, साधु शील गुण खान।।२।। इन सब की पूजा करूँ, आत्मशुद्धि के हेतु। जिन पूजा चिंतामणी, मन चिंतित फल देत।।३।। ॐ ह्रीं त्रयोदशद्वीपसंबंधिकृत्रिमाकृत्रिमजिनालय-जिनबिम्ब-तीर्थंकरकेवलिसर्वसाधु समूह! अत्र अवतर अवतर संवौषट् आह्वाननं।…