कल्याण मंंदिर स्तोत्र
कल्याण-मंदिर-स्तोत्र अभीप्सितकार्य सिद्धिदायक कल्याणमन्दिरमुदारमवद्य – भेदि – भीताभय – प्रदमनिन्दितमङ्घ्रिपद्मम्। संसारसागर – निमज्जदशेष-जन्तु- पोतायमानमभिनम्य जिनेश्वरस्य।।१।। —कुसुमलता छंद— पारस प्रभु कल्याण के मंदिर, निज-पर पाप विनाशक हैं। अति उदार हैं भयाकुलित, मानव के लिए अभयप्रद हैं।। भवसमुद्र में पतितजनों के, लिए एक अवलम्बन हैं। ऐसे पारस प्रभु के पद में, शीश झुकाकर वन्दन है।।१।। अन्वयार्थ-(कल्याणमंदिरम्)…