पिण्डस्थ ध्यान की पाँच धारणाएँ
पिण्डस्थ ध्यान की पाँच धारणाएँ १. श्री सुखसम्पन्नोऽहं २. ह्री गुणसम्पन्नोऽहं ३. धृतिगुणसम्पन्नोऽहं ४. श्रीगुणसम्पन्नोऽहं ५. कीर्तिसम्पन्नोऽहं। पुन: अपनी अन्तर्यात्रा प्रारंभ कर दें, इस यात्रा का लक्ष्य बिन्दु है-ह्रीं बीजाक्षर। चौबीस तीर्थंकरों को नमन करते हुए ध्यान का प्रथम चरण प्रारंभ करें- १. ध्यान का प्रथम चरण-सबसे पहले चित्त के द्वारा ‘ह्रीं’ पद लिखें। ह्र,…