दूसरी ढाल
दूसरी ढाल (पद्धड़ी छन्द) संसार परिभ्रमण के कारण ऐसे मिथ्यादृग-ज्ञान-चरण, वश भ्रमत भरत दुख जन्म-मरण। तातैं इनको तजिये सुजान, सुन तिन संक्षेप कहूँ बखान।।१।। अर्थ-यह जीव मिथ्यादर्शन, मिथ्याज्ञान और मिथ्याचारित्र के आधीन होकर चारों गतियों में भ्रमण करता है और जन्म-मरण के दु:खों को सहता है इसलिए भलीभांति समझकर उनको त्यागिए। उन तीनों का मैं…