श्री पार्श्वजिन स्तुति
“श्री पार्श्वजिन स्तुति” भवसंकट हर्ता पार्श्वनाथ! विघ्नों के संहारक तुम हो। हे महामना हे क्षमाशील! मुझमें भी पूर्ण क्षमा भर दो।। यद्यपि मैंने शिवपथ पाया, पर यह विघ्नों से भरा हुआ। इन विघ्नों को अब दूर करो, सब सिद्धि लहूँ निर्विघ्नतया।।१।। वाराणसि नगरी धन्य हुई, धन धन्य हुए सब नर-नारी। हे अश्वसेननंदन! तुम से, वामा…