पूज्य गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी का कृतित्व
“…पूज्य गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी का कृतित्व…” समाहित विषयवस्तु १. शिष्यों-रचनाओं और कार्यों की गणना कठिन। २. सम्पूर्णता-कार्यों की विशेषता। ३. श्रेष्ठता-रचनाओं की विशेषता। ४. रत्नत्रय निर्दोषता-शिष्यों की विशेषता। ५. कार्यकलाप-निष्काम, निस्पृह, निर्नाम भाव से। ६. कार्यों-कृतियों की निरंतरता, सूर्य-पवनवत्। ७. उत्तमोत्तम-सुपात्र शिष्य संग्रहण। ८. उदारचरितानांतु वसुधैव कुटुम्बकम्। ९. सबके लिए प्रेरक, ऊर्जावान-घर और बाहर…