अनुबद्ध केवली पूजा
अनुबद्ध केवली पूजा…… —अथ स्थापना-गीता छंद— तीर्थंकरों के तीर्थ में अनुबद्ध केवलि जिन हुये। बहुतेक यतिगण शिव गये बहुतेक अनुत्तर गये।। बहुतेक मुनि सौधर्म आदिक ग्रैवेयक तक भी गये। उन सर्व यति की थापना कर, पूजते सब सुख भये।।१।। ॐ ह्रीं चतुर्विंशतितीर्थंकरतीर्थेषु अनुबद्धकेवलि—अपवर्ग—स्वर्गप्राप्तमुनिसमूह! अत्र अवतर अवतर संवौषट् आह्वाननं। ॐ ह्रीं चतुर्विंशतितीर्थंकरतीर्थेषु अनुबद्धकेवलि—अपवर्ग—स्वर्गप्राप्तमुनिसमूह! अत्र तिष्ठ तिष्ठ…