आर्यिकाओं के २८ मूलगुण
आर्यिकाओं के २८ मूलगुण लेखिका-गणिनी ज्ञानमती स्वयंसिद्ध जैनधर्म अनादिनिधन है, इसको किसी ने स्थापित नहीं किया है। अनंतानंत काल व्यतीत हो चुका है और आगे भी अनंतानंत प्रमाण काल आवेगा तथा जो वर्तमान काल चल रहा है इन तीनों कालों में और तीनों लोकों में यह प्राणीमात्र का हित करने वाला है अतएव यह सार्वधर्म…