चौबीस तीर्थंकरों की कल्याणक तिथियाँ
चौबीस तीर्थंकरों की कल्याणक तिथियाँ
चौबीस तीर्थंकरों की कल्याणक तिथियाँ
गुरु के समक्ष व्रत ग्रहण करने का आदेश (व्रत तिथि निर्णय के आधार से) व्रतादानव्रतत्याग: कार्यो गुरुसमक्षत:। नो चेत्तन्निष्फलं ज्ञेयं कुत: शिक्षादिकं भवेत्।। यो स्वयं व्रतमादत्ते स्वयं चापि विमुञ्चति। तद्व्रतं निष्फलं ज्ञेयं साक्ष्याभावात् कुत: फलम्।। गुरुप्रद्दिष्टं नियमं सर्वकार्याणि साधयेत्। यथा च मृत्तिकाद्रोण: विद्यादानपरो भवेत्।। गुर्वभावतया त्यक्तं व्रतं किं कार्यकृद् भवेत्। केवलं मृतिकावेश्म किं कुर्यात् कर्तृवर्जितम्।।…
(१०८) वीरशासन जयंती व्रत (श्री गौतम स्वामी व्रत विधि) आज से पच्चीस सौ छ्यासठ१ वर्ष पूर्व राजगृही के विपुलाचल पर्वत पर श्रावण कृष्णा प्रतिपदा के दिन भगवान महावीर स्वामी की प्रथम दिव्यध्वनि खिरी थी अत: यही पवित्र दिन ‘‘वीर शासन जयंती’’ पर्व के नाम से प्रसिद्धि को प्राप्त है, क्योंकि तब से लेकर आज तक…
(१०७) तीर्थंकर जन्मभूमि व्रत वर्तमानकालीन २४ तीर्थंकरों की १६ जन्मभूमियों की वंदना के उद्देश्य से १६ व्रत करना है। व्रत के दिन उन-उन तीर्थंकरों की पूजन करें तथा ‘‘तीर्थंकर जन्मभूमि विधान’’ की पुस्तक से उन-उन जन्मभूमियों की भी पूजन करें। व्रत के उद्यापन में संभव हो तो सोलहों जन्मभूमियों की वंदना करें अथवा अयोध्या, हस्तिनापुर,…
(१०६) शारदा व्रत शारदा-सरस्वती की आराधना, उपासना, भक्ति आदि से भव्यजीव समीचीन ज्ञान की वृद्धि करते हुए परम्परा से श्रुतकेवली, केवली पद को प्राप्त करेंगे। यह व्रत ज्येष्ठ मास में शुक्लपक्ष में एकम से आषाढ़ कृष्णा एकम तक सोलह दिन करना है। इसी प्रकार आश्विन मास में शुक्ला एकम से कार्तिक कृ. एकम तक पुन:…
(१०५) सप्तर्षि व्रत (मृत्युंजय व्रत) आज से लगभग ९ लाख वर्ष पूर्व श्री रामचन्द्र के समय मथुरानगरी के उद्यान में सात महर्षि महामुनि पधारे थे। वहाँ वर्षायोग स्थापित किया था, उनके शरीर से स्पर्शित हवा के प्रभाव से वहाँ पर दैवी प्रकोप-महामारी रोग कष्ट दूर हुआ था। तभी से लेकर आज तक इन सप्तर्षि मुनियों…
(१०४) एकीभाव स्तोत्र व्रत एवं कथा एकीभाव स्तोत्र के रचयिता श्री आचार्य वादिराज वि. की ११वीं शताब्दी के महान् विद्वान थे। वादिराज यह उनकी पदवी थी, नाम नहीं। जगत् प्रसिद्ध वादियों में उनकी गणना होने से वे वादिराज के नाम से प्रसिद्ध हुए। आपकी गणना जैन साहित्य के प्रमुख आचार्यों में की जाती है। वादिराज…
(१०३) शांतिनाथ व्रत (शांति भक्ति व्रत) व्रत विधि-श्री शांतिनाथ भगवान सोलहवें तीर्थंकर हैं, साथ ही पाँचवें चक्रवर्ती एवं बारहवें कामदेव भी हुए हैं। इस प्रकार ये भगवान तीन पद के धारक महान हुए हैं। श्री पूज्यपाद स्वामी द्वारा रचित शांतिभक्ति साधुगण एवं श्रावकगण सभी में प्रसिद्ध है। उस शांतिभक्ति का ही यह व्रत है। इसमें…
(१०२) नवनिधि व्रत हस्तिनापुर में भगवान शांतिनाथ, भगवान कुंथुनाथ एवं भगवान अरनाथ ये तीन तीर्थंकर जन्मे हैं। ये तीनों ही तीर्थंकर तीन-तीन पद के धारक हुए हैं। ये ही इन तीनों तीर्थंकर भगवन्तों की एवं हस्तिनापुर तीर्थ की विशेषता है। इन तीनों तीर्थंकरों के तीन-तीन पदों की अपेक्षा यह ‘नवनिधि व्रत’ किया जाता है। इस…
(१०१) नवलब्धि व्रत (नवकेवललब्धि व्रत) तीर्थंकर भगवन्तों को जब केवलज्ञान प्रगट हो जाता है तब अर्हंत अवस्था में उन्हें नव केवललब्धियाँ प्राप्त हो जाती हैं। दर्शनमोहनीय के अभाव से क्षायिकसम्यक्त्वलब्धि, चारित्रमोहनीय के अभाव से क्षायिकचारित्रलब्धि, ज्ञानावरणकर्म के नाश से केवलज्ञानलब्धि, दर्शनावरण के क्षय से केवलदर्शनलब्धि, अंतरायकर्म के पाँच भेदों में से क्रमश: दानान्तराय के विनाश…