आरती
आरती….. तर्ज—मन डोले, मेरा …….. जय जय गुरुवर, हे सूरीश्वर, श्री शांतिसिन्धु महाराज की, मैं आज उतारूँ आरतिया।।टेक.।। जग में महापुरूष युग का, परिवर्तन करने आते । अपनी त्याग तपस्या से वे, नवजीवन भर जाते ।। गुरुजी नवजीवन………… जग धन्य हुआ, तव जन्म हुआ, मुनि परम्परा साकार की, मैं आज उतारूँ आरतिया।।१।। कलियुग में साक्षात्…