आचार्य श्री वीरसागर स्तुति
आचार्य श्री वीरसागर स्तुति -शंभु छन्द- सिद्धार्थतनुज श्री वीरप्रभू, सम्पूर्ण सिद्धि के दाता हैं। उनको शत शत वंदन मेरा, भक्तों के भाग्य विधाता हैं।। सब भाषामय उनकी वाणी, भविजन मनकमल खिलाती है। गणधरगुरुओं के वंदन से, भवदधि नौका मिल जाती है।।१।। इस दुषमकाल में कुन्दकुन्द-आचार्य आदि गुणमणि भास्कर। इन सबको वंदन बार-बार, ये रत्नत्रय निधि…