अथ द्वितीय परिच्छेद (प्रमाण का विषय-प्रमेय का कथन)
अथ द्वितीय परिच्छेद (प्रमाण का विषय-प्रमेय का कथन) उत्थनिका-अब प्रमाण के विषय के विसंवाद को दूर करने के लिए आगे कहते हैं- अन्वयार्थ-(तत्त्वत:) परमार्थ से (तद्-द्रव्यपर्यायात्मा) उस प्रमाण का द्रव्य पर्यायात्मक (बहि: अंत: च) बहिरंग और अंतरंग पदार्थ (अर्थ:) विषय है।।७।। अर्थ-परमार्थ से उस प्रमाण का द्रव्य पर्यायात्मक बहिरंग और अंतरंग पदार्थ विषय है।।७।। भावार्थ-प्रमाण…